रविवार, 6 अप्रैल 2008

कविता संग्रह भाग- १ (एक कहानी)

एक कहानी मैं लिखती हू , एक कहानी तू भी लिख !
बादल बादल मैं लिखती हू ,पानी पानी तू भी लिख|

बीत गई जो अपनी यादें,उन यादों को भी तू लिख!
एक निशानी मैं लिखती हू, एक निशानी तू भी लिख|

इस कलम में डाल के स्याही, लिख दे जो मन में आए!
नई कहानी मैं लिखती हू ,एक पुरानी तू भी लिख |

जीवन की इस भाग दौड़ में, क्या खोया तुमने हमने?
एक जवानी मैं लिखती हू, एक जवानी तू भी लिख |

हर व्यक्ति में छिपा हुआ है,वादी भी प्रतिवादी भी!
सारी सजाए मैं लिखती हू, काला पानी तू भी लिख |

2 टिप्‍पणियां:

Arun yadav ने कहा…

dear Reechaji,
Aapki kavitaye bahut hi sunder tarike se aapne pesh ki hai jisme bhook wala shirshak bahut hi aacha hai, waise to aapki sari kavitaye bahut achi hai lekin mein dekh raha hu ki aapne kaphi samay se koi nai kavita nahi post ki hai to is liye jaldi hi apni kavita likh kar hume padne ka mauka de...............
Keep writing........
Arun

Faiz ने कहा…

really fantastic peace of work absolutely flawless