शनिवार, 5 अप्रैल 2008

सिर्फ़ तुम .........


एक निर्मल ,कोमल, प्यारा ,एहसास हो तुम
जीवन के मरू की तीव्र प्यास हो तुम !
बेचैनी का सुकून हो तुम
इस जीवन का जुनून हो तुम
एक नन्हें प्यारे बचपन सा एहसास हो तुम !

* आवेग का बहता निश्छल नीर हो तुम
किसी डूबते को थामता तीर हो तुम !
प्रेम का आगाध सागर हो तुम !
एक अल्हड़ ,चंचल , बचपन की गागर हो तुम !

एक साधक की आस्था हो तुम !
जीवन की असीम पराकाष्ठा हो तुम !
प्रात: कालीन भोर हो तुम
चाँद और चकोर हो तुम !

बंसी की तान हो तुम
सभी सुरों का गान हो तुम !
सम्पूर्णता का समग्र ज्ञान हो तुम
अपने अस्तित्व का सम्मान हो तुम !

उस दिए का प्रकाश हो तुम !
मेरा सारा आकाश हो तुम !
एक आस हो तुम एहसास हो तुम !
इस दुनिया में कुछ ख़ास हो तुम !
मेरे दिल के कितने पास हो तुम !

एक बेबस का इमान हो तुम !
एक पंछी की उड़ान हो तुम !
और बस इतना ही की मेरे जीवन की पहचान हो तुम !!

1 टिप्पणी:

Faiz ने कहा…

a very honest confession that what a person really meant to u
a natural thing when u fall in love wid someone, u appreciate him with ur precious word not every one is lucky coz there r many few people who have some one who wrtes poem on him