शनिवार, 5 अप्रैल 2008

जीवन..........



जीवन उस पथ का नाम है ,
जिसे हम संघर्ष कहते है !
इस संघर्ष के परिणाम को ही ,
हम इस जीवन का मर्म कहते है |

इस जीवन का एक साथी भी है ,
जिसे शायद हम धर्म कहते है !
इस धर्म पर चलने को ही हम ,
जीवन का सबसे बड़ा कर्म कहते है |

लेकिन आजके सन्दर्भ में .......

धर्म तो वह शाला है जहाँ
शिक्षा है ,केवल ज्ञान की
लेकिन फिर भी गठरी भरती
केवल बेईमान इन्सान की |

जीवन में इन्सान तो वो है ,
जिसमें इंसानियत बाकी हो !
लेकिन आज तो इन्सान वो है ,
जिसकी हैवानियत साथी हो |

जीवन में हैवानियत तो वह है ,
जिसमें पशुता कूट कूट कर भरी हो ,
लेकिन पशुता सिर्फ़ वह है ,जिसमें
भूख प्यास सनी हो |

भूख और प्यास केवल
दरिद्रता की ही धनी है !
और दरिद्रता की आड़ में ही तो
ये शान -ओ -शौकत पली है |

शान -ओ -शौकत की ये आन्धिया
तो खूब चली है !
लेकिन टिक न सकी ये चार दीवारे ,
जो आज स्वर्ण और खून से बनी है |

इन चार दीवारों में भी तो ,
लोहे की सलाखे लगी है ,और
साथ में ही तो लोगो की कुछ
परछाईया भी तो टंगी है |

ये परछाईया तो खामोशी के रंगो
से यू रंगी है ,
जिन खामोशियों से जीवन की ये ,
सुनहरी खुशनुमा चित्रपट कोरी सनी है ||

1 टिप्पणी:

Faiz ने कहा…

symmetry is gud word selection is fair enough but ur first lines doesnot match the middle ones
it seems like u have started writing bout something else and ended about something different
not a big deal it happens some times