गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

भूख .....



किसी ने मुझसे पूछा , भूख क्या होती है ?
तो मैंने कहा ......

अमीर को अपनी अमीरी बढाने की भूख ,
गरीब को अपनी फकीरी घटने की भूख ,
व्यक्ति को व्यक्ति दबाने की भूख ,
उनके हाथो की रोटी छीनकर खाने की भूख ,
एक प्रेमी को है ,सच्चा प्यार पाने की भूख ,
अपना सर्वस्व उस पर लूटाने की भूख |

सच यही तो है, इस पागल ज़माने की भूख !
अपनी इस भूख में सब भूल जाने की भूख !

एक बच्चे को माँ का दूध पाने की भूख
उसकी छाया में सब भूल जाने की भूख
शक्ति से शक्ति बढाने की भूख
इस अंधेरे में सबको काटकर खाने की भूख |

सच यही तो है ,इस पागल ज़माने की भूख !
अपनी इस भूख में सब कुछ भूलाने की भूख !

लेखक को शब्द जोड़कर रखने की भूख ,
नेता को शब्द तोड़कर बकने की भूख ,
रेगिस्तान में प्यासे को एक बूँद चखने की भूख ,
एक भूखे को भूखे पर लात रखने की भूख |

समाज में औरत को नोंच कर खाने की भूख ,
स्त्री को अपना मान बचाने की भूख ,
किसी को है ,इज्ज़त कमाने की भूख ,
किसी को है इज्ज़त गवाने की भूख |

सच यही तो है इस पागल ज़माने की भूख !
अपनी इस भूख में सब कुछ भूलाने की भूख !

शायद मैं उसे समझा पाई हूँ , की क्या होती है भूख ?

10 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

Yes Reecha this is the best one

आपने अपनी इस रचना में बेहतरीन भाव भर दिए हैं ...आपको ढेरो बधाईयाँ

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Navnit Nirav ने कहा…

chaliye de se aaye par durust aaye. achchhi kavit hai.Kuchh bhookhon ki charcha baki rah gayi hai asha hai ki unhein bhi inmein jodengi.
Dhanyawad
Navnit Nirav

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

रिचा जी सर्वप्रथम तो आपको आपकी इस रचना भूख के लिए बधाई दूंगा सही मायनों में भूख शब्‍द को बखूबी न्‍याय के साथ पेश किया है आपने इसमें कोई अतिश्‍योक्ति भी नहीं है बहुत ही अच्‍छी लगी आपकी यह रचना बहुत बहुत धन्‍यवाद एक अच्‍छी सुंदर और खुबसूरत रचना को पढवाने के लिए निरंतरता के लिए आपको हमारी शुभकामनाएं

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर. जितनी सुन्दर रचना, उतनी ही सुन्दर तस्वीर...

Tripti ने कहा…

Dear Richa,

I am fine here, hope you are doing good too.
I live every day and wait for the day to get over,hoping that nest day will be better.
You write very well.

Take care

Reecha Sharma ने कहा…

shukriya aap sabhi ka.

Jayant Chaudhary ने कहा…

"समाज में औरत को नोंच कर खाने की भूख ,
स्त्री को अपना मान बचाने की भूख ,"

इनसे पूरी तरह सहमत हूँ...
कितनी अच्छी व्याख्या है भूख की...

बहुत सुन्दर.. रचना है.

~जयंत

मीत ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा है... बहुत पसंद आई ये भूख की तस्वीर
मीत

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

भूख के कितने ही रंग दिखा दिये आपने। बहुत खूब।

sanju ने कहा…

weldone u r a good artist.