शनिवार, 11 अप्रैल 2009

सिर्फ़ तुम .........




एक निर्मल ,कोमल, प्यारा ,एहसास हो तुम
जीवन के मरू की तीव्र प्यास हो तुम !
बेचैनी का सुकून हो तुम
इस जीवन का जुनून हो तुम
एक नन्हें प्यारे बचपन सा एहसास हो तुम !

* आवेग का बहता निश्छल नीर हो तुम
किसी डूबते को थामता तीर हो तुम !
प्रेम का आगाध सागर हो तुम !
एक अल्हड़ ,चंचल , बचपन की गागर हो तुम !

एक साधक की आस्था हो तुम !
जीवन की असीम पराकाष्ठा हो तुम !
प्रात: कालीन भोर हो तुम
चाँद और चकोर हो तुम !

बंसी की तान हो तुम
सभी सुरों का गान हो तुम !
सम्पूर्णता का समग्र ज्ञान हो तुम
अपने अस्तित्व का सम्मान हो तुम !

उस दिए का प्रकाश हो तुम !
मेरा सारा आकाश हो तुम !
एक आस हो तुम एहसास हो तुम !
इस दुनिया में कुछ ख़ास हो तुम !
मेरे दिल के कितने पास हो तुम !

एक बेबस का इमान हो तुम !
एक पंछी की उड़ान हो तुम !
और बस इतना ही की मेरे जीवन की पहचान हो तुम !!

28 टिप्‍पणियां:

"अर्श" ने कहा…

ACHHI RACHANAA ACHEE BHAAV KE SATH.. JAARI RAKHE BADHAYEE AAPKO...


ARSH

Satish Chandra Satyarthi ने कहा…

वाह! क्या ख़ूबसूरत कविता लिखी है आपने.
सरल शब्दों में गहरे भावों का प्रवाह.
और सबसे बड़ी बात की ले और छंद को कहीं भी कमजोर नहीं पड़ने दिया है अपने.
बधाई मेरी तरफ से .

जयंत - समर शेष ने कहा…

Woww...

I really liked this one...
Just want to know who is that lucky one :))
Just kidding.

Good one.

~JC

pooja ने कहा…

bahut aacha likha haa as usual...........really me fan ban gai hoo apki kavitayo ki....

मीत ने कहा…

बहुत सुंदर लिखती हैं...
जारी रहे..
कलम का मतलब जानती हैं आप...
keep it up
मीत

कुश ने कहा…

बहुत ही उम्दा लेखन.. कुछ कुछ शब्द तो बहुत ही बढ़िया है.. शब्दों के चयन के साथ साथ भाव का संयोजन कमाल का है..

vijay kumar sappatti ने कहा…

main pahli baar aaya hoon ,aapke blog par , itni sundar kavita hai .. man bheeg gaya ji .

aapko dil se badhai ..

mere poem blog par aapka swagat hai : www.poemsofvijay.blogspot.com

dhanywad

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

ऋचा शर्मा जी आज आपके ब्‍लाग पर पहली बार शायद आना हो पाया है लेकिन आपके ब्‍लाग को पढने के बाद मुझे नहीं लगता कि मैं यहां पर आए बिना रह पाऊंगा और मुझे लग रहा है जितना यहां पर भ्रमण करता रहूंगा उतना ही आपसे सीख पाऊंगा बहुत अच्‍छा लिखते हो आप आपके शब्‍दों में जान है सच

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

ऋचा शर्मा जी आप मेरे ब्‍लाग पर आए और जो आपने मुझे सलाह दी है सच मानो तो मेरे लिए अमृत तुल्‍य है। बहुत खुशी हुई कि आप ने मेरी गलती को बताया। बहुत ही अच्‍छा लगा। आपका तहेदिल से बारम्‍बार शुक्रिया।

sujata sengupta ने कहा…

Beautiful!!!

sujata sengupta ने कहा…

beautiful!!!

Unknown ने कहा…

उस दिए का प्रकाश हो तुम !
मेरा सारा आकाश हो तुम !
एक आस हो तुम एहसास हो तुम !
इस दुनिया में कुछ ख़ास हो तुम !
मेरे दिल के कितने पास हो तुम !



Richaji, very nice,
Keep it up.........

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) ने कहा…

बहुत अच्छी तो नहीं कहूँगा.....मगर हाँ अच्छी अवश्य है.....इसकी विषय-वस्तु ही ऐसी है....कि दिल को छू जाना ही लाजिम है....!!

Tripti ने कहा…

Hi there

I like your blog and so juts want to pass you some friendship award, please come to http://www.life-is-a-quest.blogspot.com/ and pick up your award, hope you wont mind it, since we dont know each other.

Take care

नवनीत नीरव ने कहा…

ek bebas ka iman ho tum...........
achchha laga padh kar.kabhi kabhi kavita dwara kisi bhi ahsas ki abhivyakti saral aur sahaj dhang se ki jaati hai.Usaka yah ek udahran hai.Phir bhi ek baat kahna chahunga ki thoda waqt yadi aap is kavita ko aur detin to shayad aur prabhavshali ban sakti thi.
Achchhi kavita ke liye dhanyawad.
Navnit Nirav

pooja ने कहा…

AS usual bahut hi badiya haa.......

नवनीत नीरव ने कहा…

achchhi kavita hai.Bahut bahut dhanyawad

Dr. Amarjeet Kaunke ने कहा…

rachna, both of ur poems are v fine n touchy....congrates.....amarjeetkaunke@gmail.com

Dr. Amarjeet Kaunke ने कहा…

rachna, both of ur poems are very beautiful n touchy....congrates

मीत ने कहा…

उस दिए का प्रकाश हो तुम !
मेरा सारा आकाश हो तुम !
एक आस हो तुम एहसास हो तुम !
इस दुनिया में कुछ ख़ास हो तुम !
मेरे दिल के कितने पास हो तुम !
वाह! कितना सुंदर लिखती हैं आप...
बहुत सुंदर...
पढ़कर बहुत अच्छा लगा...
मीत

मीत ने कहा…

रिचा जी यह पोस्ट शायद मैंने आपके ब्लॉग पर पहले भी पढ़ी है...
पर कोई बात नहीं फिर से पढ़कर अच्छा लगा...
मीत

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बंसी की तान हो तुम
सभी सुरों का गान हो तुम !
सम्पूर्णता का समग्र ज्ञान हो तुम
अपने अस्तित्व का सम्मान हो तुम !

बहुत सुन्दर........बधाई.

shivraj gujar ने कहा…

bahut hi badiya. man ko chho lene wale bhav. shabdon main ravani hai. pravah kahin badhit nahi hota. achhi rachana ke liye badhai.
vaqt mile to mere blog (meridayari.blogspot.com) par bhi aayen

divya naramada ने कहा…

भावप्रवण रचना...

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

jivan ki jo pahchaan ban jaata he uske liye shbd bhi kam padhne lagte he, bahut khoobsoorti se apne sang lage us bhaav ko utaaraa he jo saaye ki tarah chalta to he kintu use bhaan bhi nahi hota ki vo itna khoobsoorat ho bhi sakta he/???

Reecha Sharma ने कहा…

aap sabhi ka bahut bahut shukriya mere blog par aakar mera protsaahan badhaane k liye

Reecha Sharma ने कहा…

shukriya AMITABH JI , ARSH JI, SATISH JI, JAYANT JI, NEHA , KUSH ,MOHAN JI , SUJAATA , TRIPTI, MEET, AMARJEET JI , SHIVRAJ JI , AACHARYA SANJEEV VERMA JI TAHE DIL SE AAP SABHI KO BAHUT BAHUT SHUKRIYA .

अलीम आज़मी ने कहा…

behtareen likha hai jitni tareef ki jaaye kam hai waqai me aap ka alfaazon par achchi pakad hai likhte rahiye
apka dost
aleem azmi