शुक्रवार, 8 मई 2009

रिश्ता.......

इस ज़िंदगी इस ज़माने में , कोई मिलता है ,कोई बिछड़ता है !
इस मिलने बिछड़ने की कशमकश में ही तो ,कोई न कोई रिश्ता पिछड़ता है!
रिश्ता बनाना तो आसन हो जाता है ,हमारे लिए
फिर क्यों ? वो रिश्ता सिकुड़ता है !
बस ठंड से कापते उस बच्चे की तरह ,वो रिश्ता यूही ठिठुरता है !
उस ठिठुरते रिश्ते पर, कोई और रिश्ता अपने रहमो करम की चादर को तो ढकता है !
लेकिन ..........
फिर भी उस चादर में से बारिश का पानी बूँद बनकर टपकता है !
ज़िंदगी में हर चीज़ को यू आसानी से पा लेना आसन तो नही होता ,
लेकिन ज़िंदगी है ,और इस ज़िंदगी में हर कोई हर किसी चीज़ के लिए भटकता है !
रिश्ता बनने की आस तो हर मन में होती है ,
लेकिन ............
जब रिश्ता टूटता है, तो फिर क्यों एक बूँद आंसू आंख से टपकता है !जी हा बिल्कुल वैसे ही ,
जैसे तेज़ भूख से एक छोटा बच्चा बिलखता है !
यह भूख न जाने कब शांत होगी ? बड़ा मुश्किल सवाल यह लगता है !
और
जीवन मेरा क्यों मुझे एक जंजाल सा लगता है ? इस जंजाल से निकलने को अब मेरा मन भी करता है !
लेकिन .............
रस्मो की दीवारों से फिर मेरा मन क्यों डरता है ?
शायद इसी लिए तो इस मिलने बिछड़ने की कशमकश में कोई न कोई रिश्ता पिछड़ता है !

21 टिप्‍पणियां:

"अर्श" ने कहा…

RICHAA JI BAHOT HI KHUBSURATI SE AAPNE APNA PAKSH RAKHAA HAI RISHTE KE MAAMLE ME BAHOT ACHHI BAAT KAHI HAI AAPNE... BADHAAYEE


ARSH

venus kesari ने कहा…

खूबसूरत ख्याल

वीनस केसरी

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

रिश्ता बनाना तो आसन हो जाता है ,हमारे लिए
फिर क्यों ? वो रिश्ता सिकुड़ता है !

प्रश्न भी सही उठाया, और विश्लेषण भी अच्छा किया.
भावों को अमली जमा पहनाने की बहुत शक्ति है आपके पास,

ऐसे ही लिखती रहे,

शुभकामनाएं

चन्द्र मोहन गुप्त

Nidhi Trivedi Mishra ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Nidhi Trivedi Mishra ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Nidhi Trivedi Mishra ने कहा…

हर एक कविता, उस दर्द को बयान कर रही है,
जो तुम्हे अपनो से मिला है.
इस ज़हर को अपने मन से निकालने का रास्ता खोजो.
कम उम्र मे यूँ खुद की खुशियाओं से रिश्ता ना तोडो.
यूँ तो नही है कोई रिश्ता मेरा तुम्हारा.
जो दर्द है तुम्हे कुछ मेरे दर्द सा लगता है.
इस दर्द के ही रिश्ते के नाते, ये कह रही हूँ.
खुद को खुशियों के रिश्ते मे बाँध लो.
ना करो परवाह ज़माने की,अपनी खुशियों को तलाश लो.

नीरज कुमार ने कहा…

लेकिन ............
जब रिश्ता टूटता है, तो फिर क्यों एक बूँद आंसू आंख से टपकता है...
Everybody try to exhibit his strong personality but the pain of being alone or the feeling of loneliness is affecting the mental-strength of everybody...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत असरदार रचना.

Jayant Chaudhary ने कहा…

"इस ज़िंदगी इस ज़माने में , कोई मिलता है ,कोई बिछड़ता है !
इस मिलने बिछड़ने की कशमकश में ही तो ,कोई न कोई रिश्ता पिछड़ता है!"

Waah kyaa baat hai.
Richaa ji kamaal hai...

~Jayant

अमिताभ भूषण "अनहद" ने कहा…

रिश्ता बनने की आस तो हर मन में होती है ,
लेकिन ............
जब रिश्ता टूटता है, तो फिर क्यों एक बूँद आंसू आंख से टपकता है
ऋचा जी आप ने सटीक मर्म निकाला है रिश्तो का ,बधाई स्वीकार करिए

amitabhpriyadarshi ने कहा…

reecha ji rishta tootane ka dard rishta jodane wala hi samajh sakta hai. yeh aisee hook hai jise bayaan nahee kiya ja sakta.

Kavi Kulwant ने कहा…

तांत्रिकों का चक्कर ..
हंसमुख राठौर की कहानी पढ़कर दुख हुआ, दर्द हुआ किंतु अचंभा नही हुआ. अपनी ही बेटी को बंधक बना कर उसके साथ सालों कुकर्म करना; हैवानियत की एक मिसाल है. धन की हवस और तांत्रिकों का सहयोग आदमी को हैवान बनाने के लिए काफी होते हैं. आदमी के अपने अंदर की हवस, धन के लिए अतृप्त पिपासा अससे क्या नही करवा देते. वह मारा मारा फिरता है और ऐसे तांत्रिक मिल जाएं जो अपनी हवस और धन की पिपासा के लिए उन्हें उकसाएं और उनको हैवानियत की राह दिखाएं तो आदमी को हैवान बनते भला कितनी देर लगती है ?

मैं भी एक ऐसे परिवार को जानता हूँ, जिन्होंने अपनी धन की इसी अतृप्त पिपासा के चलते खुद एक बाप और एक भाई ने अपनी ही (?) बहन / बेटी (विवाहिता) और उसके पति और बच्चों का जीवन बरबाद कर डाला. हालांकि उस लड़की को अपने उन तथाकथित बाप और भाई की करतूतों की अच्छी प्रकार से जानकारी थी; इसीलिए उसने अपने पति एवं बच्चों को को सालों अपने उन तथाकथित बाप और भाई से दूर रखने की कोशिश की और अपने पति को भी हजारों बार समझाया कि उसके इन तथाकथित बाप और भाई से दूर रहे. लेकिन अपनी सादगी के चलते उसके पति को कभी भी यह बात समझ नही आई; और वह उनको अपने बाप और भाई की तरह ही चाहता रहा.

अपनी धन के प्रति इसी अतृप्त पिपासा के चलते एवं तांत्रिकों के चक्कर में आकर आज तक अपनी उसी बहन / बेटी और उसके पति तथा बच्चों को आठ नौ बार Slow Poison / Toxins छुप छुपा कर खिला खिला कर उन्हें अधमरा कर दिया है. लड़की विक्षिप्त अवस्था में है और समाज में अपने उन तथाकथित बाप / भाई के बारे में वह भला क्या बोले और कैसे बोले ? लड़की का पति इस घटना से इतना हतप्रभ है और टूट चुका है. उसे समझ ही नही आ रहा है कि क्या बाप और बाई इतने हरामी भी हो सकते हैं ?? !! वह अपनी उसी सादगी के चलते एक एक कदम चल कर दुनिया वालों को सच दिखाने की, सच बताने की कोशिश कर रहा है. और इसी आशा में जी रहा है कि भगवान उसको न्याय देगा ! इस कलयुग में भी सत्य की जीत होगी ! सत्यमेव जयते ! वाह रे बेवकूफ इंसान !

समाज में तांत्रिक कुकुरमुत्तों की तरह फैले हुए हैं जो भटकों को हैवानियत की राह पर डाल देते हैं. सरकार को इन तांत्रिकों की दुकानों को बंद कराना चाहिए. हर न्यूजपेपर में तांत्रिकों के विज्ञापनों की भरमार होती है. अखबार वालों को स्वनियंत्रण के तहत तांत्रिकों के विज्ञापन बंद कर देने चाहिएं. साथ ही टी वी पर आने वाले इनके विज्ञापनों पर रोक के साथ साथ, कितने ही सीरियलों में आने वाले तांत्रिक क्रियाकलापों पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.

मै ऐसा नही कहता कि तंत्र मंत्र नही होता यां इसका असर नही होता. तंत्र मंत्र भी निर्वाण प्राप्ति का ही एक साधन होना चाहिए न कि समाज में कुकर्म करने के लिए यां अपनी अतृप्त पिपासाओं के लिए हैवानियत करने के लिए और वह भी अपनों के साथ ही !

कुलवंत सिंह

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

are wah, itne AMITABH bhi he....///
ab ye amitabh kya tippani kare, vese rishto ki baat he to meri samjh se rishte ki gahri vyakhya ki jaaye to nichod me yahi prapt ho sakta he ki rishte tab tak hi sadhe rah sakte he jab tak ki saadhe jaaye..//saadhe kyu jaate he, SWARTH ynha apna aham rol nibhata he....//yakeen maaniye ynha saare rishte swaarthvash aaye he..../////////////////////////////

sifar ने कहा…

Well...you have really raised a good question.
All i can say, if you have this much depth of understanding of relationships, then definitely... all i can assure you, you have the answer.
Simply GREAT piece of work,.....keep writing.

raj ने कहा…

जब रिश्ता टूटता है, तो फिर क्यों एक बूँद आंसू आंख से टपकता है !rishto ke bare me khoob kaha hai...boht sunder kaha hai...

अनिल कान्त : ने कहा…

Rishta jab dilon ka ho to use naye rakhne mein koi khas mashakkat nahi karni padti ...lekin wahi rishta tootkar bikharne sa lagta hai jab dilon ka aapas mein mel khatm hone lagta hai

aapki rachna bahut achchhi hai ...bahut achchha likha hai aapne

satish kundan ने कहा…

सुन्दर रचना...दिल को छू गई..

Jayant Chaudhary ने कहा…

Where are you?
I have not seen you in days!!!

Einstein ने कहा…

Kavi Guru Ravindra Nath Tagore ne Apni kavita "GITANJALI" me kahe hai

Bandhu are tu durashthon ko
sada sada se gale lagata

Bandhu se jo rishta kavi-var ne kayam kiya hai vahi ek Rishta Purnatah Nishwarth hai...

Relation of Soul to Supreme...

Vaise aap ne apne bhav ko achhe tarike se vyakat ki hai..

Likhte Rahiye...

Kunwar...

lilywhite gal ने कहा…

very deep observation about life...... . all poems are good !!!

sona ने कहा…

tnk u